मछली पालन शुरू करें मात्र 60% खर्च पर, सरकार दे रही 20 हजार करोड़ की मदद - जानें पूरी जानकारी
भारत में मछली पालन का व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। गांवों और तटीय इलाकों में लाखों लोग मछली पकड़ने और मछली पालन से अपना गुजारा चलाते हैं। लेकिन पैसे की कमी, सही तकनीक न होना और बाजार तक पहुंच न होने की वजह से मछुआरे और मछली पालक मुश्किल में रहते हैं। इसी समस्या को हल करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना शुरू की है। यह योजना मछली पालन के क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए बनाई गई है। इसमें सरकार बड़ी मात्रा में आर्थिक मदद देती है और मछुआरों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है।
मत्स्य योजना कब शुरू हुई
योजना की घोषणा सबसे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 जुलाई 2019 को संसद में यूनियन बजट पेश करते समय की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 सितंबर 2020 को इस योजना को डिजिटल माध्यम से पूरे देश में लॉन्च किया। यह योजना आत्मनिर्भर भारत पैकेज का एक अहम हिस्सा है। शुरुआत में यह योजना पांच साल के लिए यानी 2020-21 से 2024-25 तक चलाई जानी थी, लेकिन अब इसे 2025-26 तक बढ़ा दिया गया है। सरकार ने इस योजना के लिए 20,050 करोड़ रुपये का बजट रखा है, जो मछली पालन के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी राशि है।
क्यों जरूरी है यह योजना
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। करीब तीन करोड़ लोग मछली पालन और इससे जुड़े कामों में लगे हुए हैं। इनमें से ज्यादातर लोग गरीब और पिछड़े समुदाय से आते हैं। परंपरागत तरीकों से मछली पकड़ना और बेचना इनकी रोजी-रोटी का साधन है। लेकिन पुराने तरीके कम मुनाफा देते हैं। मछली पकड़ने के लिए अच्छी नाव और जाल चाहिए। मछली को ताजा रखने के लिए बर्फ और कोल्ड स्टोरेज की जरूरत पड़ती है। बाजार तक पहुंचने के लिए ढुलाई की व्यवस्था होनी चाहिए। इन सब के लिए पैसा चाहिए जो गरीब मछुआरों के पास नहीं होता। इसी खाई को पाटने के लिए यह योजना बनाई गई है।
योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है
सरकार का मुख्य लक्ष्य मछली उत्पादन को 70 लाख टन बढ़ाना है। निर्यात से होने वाली कमाई को एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। मछुआरों और मछली पालकों की आय दोगुनी करनी है। फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 20-25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करना है। इस योजना से 55 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार चाहती है कि देश में नीली क्रांति आए और भारत मछली उत्पादन और प्रसंस्करण में पहले नंबर पर आ जाए। छोटे मछुआरों को भी खेती योजनाओं जैसी सुविधाएं मिलें। इसके लिए अलग से मत्स्य पालन विभाग बनाया गया है।
किन-किन चीजों पर मिलती है मदद
योजना में कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। नई मछली पकड़ने की नाव खरीदने या पुरानी नाव को सुधारने के लिए पैसा मिलता है। मछली पालन के लिए तालाब बनाने की सहायता दी जाती है। आरएएस और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए मदद मिलती है। मछली के बीज और चारा बनाने की इकाइयां लगाने के लिए पैसा दिया जाता है। सजावटी मछली पालन को बढ़ावा दिया जाता है। समुद्र और तालाब में पिंजरों में मछली पालन की सुविधा दी जाती है। बर्फ बनाने के प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड वाहन खरीदने के लिए सहायता मिलती है। मछुआरों के गांवों का विकास किया जाता है। नाव का बीमा कराने में मदद की जाती है। सागर मित्र के रूप में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। मत्स्य सेवा केंद्र खोले जाते हैं।
कितना पैसा मिलता है सरकार से
योजना के तहत पैसे का बंटवारा दो तरह से होता है। पहली है सेंट्रल सेक्टर स्कीम, जिसमें पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है। दूसरी है सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम, जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर खर्च उठाते हैं। सामान्य वर्ग के लोगों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक केंद्र सरकार से मदद मिलती है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए यह मदद 60 प्रतिशत तक होती है। पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत तक है। केंद्र शासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार देती है। कुल मिलाकर 20,050 करोड़ रुपये में से करीब 12,340 करोड़ रुपये सीधे मछुआरों के काम में लगाया जा रहा है और बाकी 7,710 करोड़ रुपये मछली पालन की बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होंगे।
योजना का लाभ कौन ले सकता है
इस योजना का फायदा लेने के लिए आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए। मछली पकड़ने वाले, मछली पालन करने वाले किसान, मछली व्यापारी, मछली प्रसंस्करण करने वाले, मछली बेचने वाले और इस क्षेत्र में काम करने वाले स्वयं सहायता समूह सभी आवेदन कर सकते हैं। महिलाएं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। मत्स्य पालन से जुड़े उद्यमी और स्टार्टअप भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। मछुआरों के सहकारी संगठन और मछली पालक उत्पादक संगठन भी पात्र हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, द्वीप समूह और पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें
योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जाता है। सबसे पहले पीएम मत्स्य संपदा योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmmsy.dof.gov.in पर जाना होता है। वहां रजिस्ट्रेशन का विकल्प दिखाई देगा। अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और आधार नंबर डालकर रजिस्टर करना होता है। ओटीपी से वेरिफिकेशन होता है। इसके बाद लॉगिन करके पूरा फॉर्म भरना होता है। इसमें व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाते की जानकारी, किस काम के लिए मदद चाहिए यह सब भरना पड़ता है। सभी जरूरी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करने होते हैं। आवेदन जमा करने के बाद एक रेफरेंस नंबर मिल जाता है, जिससे आप अपने आवेदन की स्थिति जांच सकते हैं।
कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए
आवेदन के लिए आधार कार्ड जरूरी है। पैन कार्ड की कॉपी देनी होती है। बैंक पासबुक या कैंसिल चेक की कॉपी चाहिए ताकि सब्सिडी सीधे खाते में आ सके। निवास प्रमाण पत्र जैसे राशन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस लगता है। अगर किसी जाति को आरक्षण मिलता है तो जाति प्रमाण पत्र देना होता है। मछुआरा प्रमाण पत्र या मछली पालन से जुड़े होने का सबूत देना पड़ता है। जिस काम के लिए मदद मांगी जा रही है उसका विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाना होता है। जमीन या तालाब की रजिस्ट्री या लीज की कॉपी देनी होती है। पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर भी देना जरूरी है।
आवेदन के बाद क्या होता है
आवेदन जमा होने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारी दस्तावेजों की जांच करते हैं। कागजात सही होने पर आवेदन स्वीकार कर लिया जाता है। फिर जिला स्तरीय समिति परियोजना का मूल्यांकन करती है। जरूरत पड़ने पर अधिकारी जमीन या तालाब का निरीक्षण भी करते हैं। सब कुछ सही होने पर मंजूरी मिल जाती है। मंजूरी के बाद आवेदक को सूचना दी जाती है कि काम शुरू किया जा सकता है। काम पूरा होने के बाद फिर से निरीक्षण होता है। अधिकारी यह देखते हैं कि जो योजना बनाई थी वह सही तरीके से लागू हुई है या नहीं। सब कुछ ठीक होने पर प्रमाण पत्र दिया जाता है। इसके बाद सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेज दी जाती है।
योजना से मिलने वाले फायदे
इस योजना से मछुआरों और मछली पालकों को बहुत लाभ हो रहा है। आधुनिक तकनीक से मछली उत्पादन बढ़ रहा है। अच्छी नाव और जाल मिलने से ज्यादा मछली पकड़ी जा रही है। कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट से मछली खराब नहीं होती। बाजार तक पहुंचाने के लिए रेफ्रिजरेटेड वाहन मिल रहे हैं। नुकसान कम होने से ज्यादा मुनाफा हो रहा है। मछली की गुणवत्ता अच्छी होने से ज्यादा दाम मिल रहे हैं। निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा आ रही है। नए रोजगार के अवसर बन रहे हैं। युवा मछली पालन को व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं। महिलाओं को भी इस क्षेत्र में काम मिल रहा है। तटीय गांवों का विकास हो रहा है। मछुआरों की आय बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
योजना की खास बातें
सरकार ने मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल की हैं। सागर मित्र के रूप में 3,347 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मछुआरों के लिए ई-गोपाला ऐप जैसा एक ऐप बनाया गया है। मछली पालक उत्पादक संगठन बनाए जा रहे हैं ताकि छोटे मछुआरे मिलकर काम कर सकें। एक्वा पार्क बनाए जा रहे हैं जहां एक ही जगह पर सभी सुविधाएं मिलेंगी। बीज बैंक और ब्रूड बैंक स्थापित किए जा रहे हैं। मछली के रोगों की जांच के लिए प्रयोगशालाएं खोली जा रही हैं। समुद्री गांवों को आधुनिक मछली पकड़ने वाले गांवों में बदला जा रहा है। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तटीय गांवों को सुरक्षित बनाया जा रहा है। नाव में बायो-टॉयलेट लगाने की सुविधा दी जा रही है। मछली की गुणवत्ता की जांच और प्रमाणीकरण की व्यवस्था की जा रही है।
जरूरी सावधानी
योजना का लाभ लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से ही आवेदन करें। किसी दलाल या एजेंट को पैसे न दें। योजना का लाभ बिल्कुल मुफ्त है। केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विक्रेताओं से ही सामान खरीदें। नकली कंपनियों से सावधान रहें। सभी दस्तावेज सही और असली होने चाहिए। प्रोजेक्ट रिपोर्ट सही तरीके से बनवाएं। काम पूरा होने के बाद ही सब्सिडी मिलती है, पहले नहीं। अपने आवेदन की स्थिति समय-समय पर जांचते रहें। योजना की शर्तें बदल सकती हैं इसलिए ताजा जानकारी के लिए वेबसाइट देखते रहें। किसी भी समस्या के लिए टोल फ्री नंबर पर संपर्क करें। सरकारी दफ्तर में जाकर भी जानकारी ले सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना मछली पालन के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। यह योजना गरीब मछुआरों और मछली पालकों की जिंदगी बदल रही है। सरकार की तरफ से मिलने वाली मदद से लोग आधुनिक तकनीक अपना रहे हैं। उत्पादन बढ़ रहा है, आय बढ़ रही है और रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। अगर आप भी मछली पालन या मछली पकड़ने का काम करते हैं या इस क्षेत्र में आना चाहते हैं तो इस योजना का जरूर लाभ उठाएं। सही जानकारी लें, सही तरीके से आवेदन करें और अपने सपनों को साकार करें। यह योजना न सिर्फ व्यक्तिगत विकास का साधन है बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी मदद कर रही है।

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