रेहड़ी-पटरी वालों को मिलेगा 50,000 रुपये तक का लोन, बिना गारंटी - जानें कैसे करें अप्लाई PM SVANidhi Yojana 2025

 



रेहड़ी-पटरी वालों को मिलेगा 50,000 रुपये तक का लोन, बिना गारंटी - जानें कैसे करें अप्लाई PM SVANidhi Yojana 2025


गली-मोहल्लों में सब्जी, फल, चाय, नाश्ता और दूसरा सामान बेचने वाले रेहड़ी-पटरी वालों की जिंदगी आसान नहीं होती। छोटी-मोटी कमाई में से घर चलाना पड़ता है और धंधा बढ़ाने के लिए पैसे नहीं होते। बैंक से लोन लेना इन लोगों के लिए बहुत मुश्किल है क्योंकि न तो इनके पास कोई गारंटी होती है और न ही कागजात पूरे होते हैं। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना शुरू की है। यह योजना खासतौर पर रेहड़ी-पटरी वालों के लिए बनाई गई है। इसमें बिना किसी गारंटी के 50 हजार रुपये तक का लोन मिलता है। लोन चुकाने पर ब्याज में छूट मिलती है और डिजिटल पेमेंट करने पर कैशबैक भी मिलता है। यह योजना लाखों गरीब लोगों की जिंदगी बदल रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है।

पीएम स्वनिधि योजना क्या है

स्वनिधि का मतलब है स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि। यह एक खास माइक्रो क्रेडिट योजना है जो आवास और शहरी कार्य मंत्रालय चला रहा है। इस योजना की शुरुआत 1 जून 2020 को हुई थी। कोरोना महामारी के दौरान जब लॉकडाउन लगा तो लाखों रेहड़ी-पटरी वालों का धंधा बंद हो गया। उनकी कमाई रुक गई और घर चलाना मुश्किल हो गया। तब सरकार ने इस योजना को शुरू किया ताकि ये लोग फिर से अपना धंधा खड़ा कर सकें। पहले यह योजना दिसंबर 2024 तक के लिए थी लेकिन अब सरकार ने इसे 31 मार्च 2030 तक बढ़ा दिया है। योजना के लिए कुल 7,332 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। नई योजना से 1.15 करोड़ लोगों को फायदा होगा, जिसमें 50 लाख नए लाभार्थी भी शामिल हैं।

योजना में कितना लोन मिलता है

योजना में लोन तीन किस्तों में मिलता है। पहली किस्त में 15 हजार रुपये तक का लोन मिलता है, जो पहले 10 हजार रुपये था। यह लोन एक साल में चुकाना होता है। पहला लोन समय पर चुका देने के बाद दूसरी किस्त के लिए अप्लाई कर सकते हैं। दूसरी किस्त में 25 हजार रुपये तक का लोन मिलता है, जो पहले 20 हजार रुपये था। यह अठारह महीने में चुकाना होता है। दूसरा लोन भी समय पर लौटाने के बाद तीसरी किस्त मिलती है। तीसरी किस्त में 50 हजार रुपये का लोन मिलता है। यह तीन साल में चुकाना होता है। इस तरह कुल मिलाकर 50 हजार रुपये तक का फायदा उठा सकते हैं। सभी लोन बिना किसी गारंटी या जमानत के मिलते हैं। बैंक या एनबीएफसी से यह लोन लिया जा सकता है।

योजना से मिलने वाले फायदे

इस योजना के कई बड़े फायदे हैं। लोन बिना किसी गारंटी के मिलता है, किसी सामान को गिरवी नहीं रखना पड़ता। जो लोग समय पर लोन चुकाते हैं उन्हें सालाना 7 प्रतिशत तक की ब्याज सब्सिडी मिलती है। यह सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आती है। डिजिटल पेमेंट करने पर हर साल 1,600 रुपये तक का कैशबैक मिलता है। अगर सामान खरीदने वाले से यूपीआई या कार्ड से पेमेंट लेते हैं तो कैशबैक मिलता है। दूसरा लोन समय पर चुकाने के बाद यूपीआई से जुड़ा रुपे क्रेडिट कार्ड भी मिलता है। इस कार्ड से जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसे निकाल सकते हैं। सरकार फ्री में बिजनेस से जुड़ी ट्रेनिंग भी देती है। खाने का सामान बेचने वालों को एफएसएसएआई की तरफ से सफाई और खाद्य सुरक्षा की ट्रेनिंग मिलती है। डिजिटल स्किल सिखाई जाती है। बाजार में अपना सामान कैसे बेचें यह भी सिखाया जाता है।

कौन ले सकता है योजना का लाभ

इस योजना का लाभ सिर्फ रेहड़ी-पटरी वालों को मिलता है। जो लोग 24 मार्च 2020 या उससे पहले से शहरी इलाकों में सामान बेच रहे हैं वे अप्लाई कर सकते हैं। फल-सब्जी बेचने वाले, चाय की दुकान चलाने वाले, समोसा-पकौड़े बेचने वाले, छोटी-मोटी चीजें बेचने वाले, कपड़े-जूते का ठेला लगाने वाले, नाई की दुकान चलाने वाले, मोची, पान की दुकान वाले, फेरी वाले सभी इस योजना के लिए पात्र हैं। शहर की नगर पालिका या म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से वेंडिंग सर्टिफिकेट या पहचान पत्र होना चाहिए। अगर सर्टिफिकेट नहीं है तो भी चल जाएगा, बस नगर पालिका के सर्वे में नाम होना चाहिए। अगर सर्वे में भी नाम नहीं है तो लेटर ऑफ रिकमेंडेशन मिल सकता है। स्ट्रीट वेंडर एसोसिएशन का मेंबर होने पर भी अप्लाई कर सकते हैं।

जरूरी दस्तावेज क्या-क्या हैं

आवेदन करते समय आधार कार्ड देना जरूरी है। आधार से लिंक मोबाइल नंबर होना चाहिए। बैंक खाते की पासबुक या कैंसिल चेक की कॉपी चाहिए। खाता आधार से लिंक होना जरूरी है। नगर पालिका से मिला वेंडिंग का सर्टिफिकेट या पहचान पत्र देना होता है। अगर यह नहीं है तो सर्वे की कॉपी या लेटर ऑफ रिकमेंडेशन देना होता है। पासपोर्ट साइज फोटो लगानी होती है। कुछ जगहों पर रेहड़ी या ठेले की फोटो भी मांगी जाती है। अगर पहले कहीं से लोन लिया है तो उसका दस्तावेज भी मांगा जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि आप साबित कर सकें कि आप सच में रेहड़ी-पटरी का काम करते हैं। इसके लिए कोई भी कागजात जैसे पुराने बिल, रसीदें या किसी भी तरह का सबूत काम आ सकता है।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

इस योजना के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन है। सबसे पहले पीएम स्वनिधि की आधिकारिक वेबसाइट pmsvanidhi.mohua.gov.in पर जाना होता है। वहां अपने मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होता है। ओटीपी डालकर मोबाइल वेरीफाई करना होता है। इसके बाद लॉगिन करके पूरा फॉर्म भरना होता है। फॉर्म में अपनी जानकारी, बैंक की डिटेल, कहां सामान बेचते हैं यह सब भरना होता है। अपने शहर का नाम और नगर पालिका का नाम चुनना होता है। कितने रुपये का लोन चाहिए यह भरना होता है। पहली बार 15 हजार तक, दूसरी बार 25 हजार तक और तीसरी बार 50 हजार तक चुन सकते हैं। सभी जरूरी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करने होते हैं। आधार कार्ड, बैंक पासबुक, वेंडिंग सर्टिफिकेट और फोटो अपलोड करनी होती है। आवेदन जमा करने के बाद एक रेफरेंस नंबर मिल जाता है। इस नंबर से आप अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं।

कॉमन सर्विस सेंटर से भी अप्लाई करें

अगर आपको इंटरनेट चलाना नहीं आता या ऑनलाइन आवेदन में दिक्कत आ रही है तो कॉमन सर्विस सेंटर की मदद ले सकते हैं। हर शहर में कई सीएससी सेंटर होते हैं जहां जन सेवा केंद्र होता है। वहां जाकर अपने दस्तावेज दिखाइए। सीएससी वाला आपका आवेदन भर देगा। माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं के एजेंट भी आवेदन में मदद करते हैं। बैंकिंग करेस्पोंडेंट भी मदद कर सकते हैं। नगर पालिका के ऑफिस में भी जानकारी मिल सकती है। टोल फ्री नंबर 1800 11 1979 पर फोन करके भी मदद ले सकते हैं। यह नंबर सुबह साढ़े नौ बजे से शाम छह बजे तक खुला रहता है। हेल्पलाइन आठ भाषाओं में उपलब्ध है। ईमेल से भी जानकारी ले सकते हैं।

आवेदन के बाद क्या होता है

आवेदन जमा होने के बाद नगर पालिका के अधिकारी आपके कागजात चेक करते हैं। वे देखते हैं कि आप सच में रेहड़ी-पटरी का काम करते हैं या नहीं। कभी-कभी अधिकारी आपकी दुकान या ठेले पर भी आकर देख सकते हैं। सब कुछ सही होने पर आवेदन को मंजूरी मिल जाती है। मंजूरी मिलने के बाद आपके चुने हुए बैंक को आवेदन भेज दिया जाता है। बैंक के अधिकारी फिर से कागजात चेक करते हैं। कुछ लोगों को बैंक बुला सकता है या फोन पर बात कर सकता है। सब कुछ ठीक होने पर लोन मंजूर हो जाता है। पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर तीस दिन तक का समय लगता है। अगर कागजात पूरे हैं तो जल्दी भी हो सकता है। लोन मंजूर होने के बाद पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आ जाता है। एसएमएस से सूचना मिल जाती है कि लोन आ गया है।

लोन कैसे चुकाना है

लोन की किस्त हर महीने चुकानी होती है। पहला लोन एक साल में बारह किस्तों में चुकाना होता है। दूसरा लोन अठारह महीने में अठारह किस्तों में चुकता होता है। तीसरा लोन तीन साल में छत्तीस किस्तों में लौटाना पड़ता है। हर महीने बैंक खाते से ईएमआई कट जाती है। इसलिए खाते में पैसे रखना जरूरी है। अगर समय पर किस्त चुकाते हैं तो ब्याज सब्सिडी मिलती है। बैंक जितना ब्याज लेता है उसमें से सात प्रतिशत सरकार वापस कर देती है। यह पैसा सीधे खाते में आता है। अगर किस्त नहीं चुकाते तो सब्सिडी नहीं मिलेगी। समय पर लोन चुकाने से अगली किस्त का लोन जल्दी मिल जाता है। अगर पहला लोन समय पर नहीं चुकाया तो दूसरा लोन नहीं मिलेगा। इसलिए हर महीने किस्त जरूर चुकाएं।

डिजिटल पेमेंट से कैसे मिलता है कैशबैक

योजना में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जाता है। जब भी कोई ग्राहक आपसे सामान खरीदे तो उससे यूपीआई, पेटीएम, फोनपे, गूगलपे या कार्ड से पेमेंट लेने की कोशिश करें। अपनी रेहड़ी पर यूपीआई का क्यूआर कोड लगाएं। जितना ज्यादा डिजिटल पेमेंट होगा उतना ज्यादा कैशबैक मिलेगा। खुदरा बिक्री पर यानी छोटे ग्राहकों से पेमेंट लेने पर सालाना 1,200 रुपये तक का कैशबैक मिलता है। थोक में सामान खरीदने पर 400 रुपये तक का कैशबैक और मिल सकता है। कुल मिलाकर 1,600 रुपये सालाना कैशबैक मिल सकता है। यह पैसा भी सीधे बैंक खाते में आता है। महीने में कम से कम एक डिजिटल पेमेंट जरूर लेना चाहिए तभी कैशबैक मिलेगा। डिजिटल पेमेंट से फायदा यह भी है कि पैसे सीधे खाते में आ जाते हैं। नकली नोट की टेंशन नहीं रहती। ग्राहक को भी सुविधा होती है।

स्वनिधि से समृद्धि कार्यक्रम क्या है

स्वनिधि योजना के साथ एक और खास प्रोग्राम चलाया जा रहा है जिसका नाम है स्वनिधि से समृद्धि। यह कार्यक्रम रेहड़ी-पटरी वालों और उनके परिवार के समग्र विकास के लिए है। इसमें लोगों को सरकार की दूसरी योजनाओं से जोड़ा जाता है। जैसे प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत बैंक खाता खुलवाया जाता है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ा जाता है। इनमें कम प्रीमियम में बीमा मिलता है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना से जोड़ा जाता है, जिसमें साठ साल के बाद पेंशन मिलती है। उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिलता है। आयुष्मान भारत से मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। हर महीने लोक कल्याण मेला लगाया जाता है जहां एक ही जगह पर सभी सरकारी योजनाओं का फायदा मिल सकता है। अब तक 47 लाख से ज्यादा लोगों को इन योजनाओं से जोड़ा जा चुका है। 1.46 करोड़ से ज्यादा योजनाओं की मंजूरी दी जा चुकी है।

योजना की उपलब्धियां

जुलाई 2025 तक 96 लाख से ज्यादा लोन दिए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 13,797 करोड़ रुपये है। 68 लाख से ज्यादा रेहड़ी-पटरी वालों को फायदा मिल चुका है। 47 लाख लोग डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं और 557 करोड़ से ज्यादा डिजिटल ट्रांजेक्शन हो चुके हैं। इनकी कुल राशि 6.09 लाख करोड़ रुपये है। 241 करोड़ रुपये का कैशबैक दिया जा चुका है। योजना को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिल चुके हैं। 2023 में प्रधानमंत्री एक्सीलेंस इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन अवार्ड मिला है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए सिल्वर अवार्ड भी मिल चुका है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस योजना से लोगों की आय बढ़ी है। लोन लेकर लोगों ने अपना धंधा बढ़ाया है। नई रेहड़ी खरीदी है, ज्यादा सामान रखने लगे हैं। कुछ लोगों ने फ्रिज खरीदा है ताकि ठंडे पेय बेच सकें। महिलाओं को भी बहुत फायदा हुआ है। 43 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। ओबीसी वर्ग के 44 प्रतिशत लोग हैं। एससी और एसटी के 22 प्रतिशत लोग हैं। यानी समाज के सभी वर्गों को फायदा मिल रहा है।

रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा

योजना में अब एक नई सुविधा जोड़ी गई है। जो लोग दूसरा लोन समय पर चुका देते हैं उन्हें यूपीआई से जुड़ा रुपे क्रेडिट कार्ड दिया जाएगा। यह एक खास तरह का क्रेडिट कार्ड है जो यूपीआई से लिंक होता है। इस कार्ड से आप किसी भी दुकान पर पेमेंट कर सकते हैं। एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं। जरूरत पड़ने पर तुरंत क्रेडिट मिल जाता है। धंधे में अचानक पैसे की जरूरत पड़ी या घर में कोई इमरजेंसी आ गई तो इस कार्ड से पैसे निकाल सकते हैं। बाद में किस्तों में चुका सकते हैं। यह सुविधा रेहड़ी-पटरी वालों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इनकी कमाई रोज की होती है। कभी-कभी पैसों की जरूरत तुरंत पड़ जाती है। क्रेडिट कार्ड से वे अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं।

जरूरी सावधानी और सुझाव

योजना का लाभ लेते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखें। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से ही आवेदन करें। किसी दलाल या बिचौलिए को पैसे न दें। योजना बिल्कुल मुफ्त है, कोई चार्ज नहीं लगता। कुछ लोग नाम पर पैसे मांगते हैं, उनसे सावधान रहें। आवेदन के लिए सिर्फ सरकारी वेबसाइट, सीएससी सेंटर या अपने बैंक की मदद लें। सभी कागजात असली होने चाहिए। गलत कागजात देने पर परेशानी हो सकती है। लोन की किस्त हर महीने जरूर चुकाएं। डिफॉल्ट होने पर अगला लोन नहीं मिलेगा। डिजिटल पेमेंट जरूर अपनाएं, इससे कैशबैक मिलेगा। लोन का पैसा सिर्फ धंधे में ही लगाएं, दूसरे कामों में खर्च न करें। जितना ज्यादा लोन लेंगे उतनी ज्यादा किस्त चुकानी पड़ेगी, इसलिए जरूरत के हिसाब से ही लोन लें। अपने आवेदन की स्थिति समय-समय पर चेक करते रहें। किसी समस्या के लिए टोल फ्री नंबर पर संपर्क करें।

निष्कर्ष

पीएम स्वनिधि योजना रेहड़ी-पटरी वालों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। यह योजना छोटे व्यापारियों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ रही है। बिना गारंटी के लोन मिल रहा है। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिल रहा है। लोगों की आय बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। अगर आप भी रेहड़ी-पटरी का काम करते हैं तो इस योजना का जरूर लाभ उठाएं। ऑनलाइन आवेदन करें या नजदीकी सीएससी सेंटर में जाकर म